राजनीतिक विरोध अब नीतियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नेताओं के परिवार, निजी जीवन और रिश्तों पर व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गया है। इसके मुकाबले सुषमा स्वराज और अरुण जेटली के दौर की मिसाल दी जाती है, जब तीखी बहस के बावजूद संवाद में राजनीतिक गरिमा बनी रहती थी। सवाल है-राजनीति में व्यक्तिगत हमलों का यह माहौल किसने बनाया और क्या अब इसे बदलने की जिम्मेदारी भी उसी की नहीं है? Video -@neeraj_jhaa & @AadeshRawal देखिए पूरी वीडियो Molitics के यूट्यूब चैनल में लिंक - #IndianPolitics #PoliticalDebate #PoliticalDiscourse #PoliticalCulture #Democracy
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