आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जनरेटेड फर्जी सामग्री और सोशल मीडिया पर तथ्यहीन दावों को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय में एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रक्रिया सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया द्वारा दायर ₹2 करोड़ के मानहानि मुकदमे पर सुनवाई करते हुए जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने इस मामले पर सुनवाई की। यह विवाद तब शुरू हुआ जब स्वतंत्र पत्रकार सौरव दास द्वारा X (ट्विटर) पर एक AI-जनरेटेड ग्राफिक साझा किया गया, जिसमें गौरव भाटिया के नाम से फर्जी बयान दर्ज था। भाटिया द्वारा आपत्ति जताए जाने पर दास ने पोस्ट को AI-निर्मित स्वीकार करते हुए हटा दिया, लेकिन CJP (सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस) के आशुतोष रांका द्वारा इसे री-पोस्ट कर आगे बढ़ाने का आरोप लगाया गया। अदालत में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के वकीलों ने विवादित पोस्ट्स को 24 घंटे के भीतर हटाने का अंडरटेकिंग (वचन) दिया। वहीं कोर्ट ने भाटिया द्वारा मांगी गई 'डायनेमिक इंजंक्शन' (भविष्य के पोस्ट्स पर स्वतः रोक) की राहत पर सीधे आदेश देने के बजाय उन्हें पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से संपर्क करने का विकल्प दिया। #GauravBhatia #DelhiHighCourt #SauravDas #AshutoshRanka #CJP
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