पत्रकार ने स्कूल की खस्ताहाल इमारत, बुनियादी सुविधाओं की कमी और छात्रों की समस्याओं को लेकर ग्राउंड रिपोर्टिंग की थी, जिसके बाद उन पर सरकारी काम में बाधा डालने और प्रशासनिक छवि धूमिल करने जैसी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया था। उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पुलिसिया कार्रवाई पर रोक लगाई और निष्पक्ष पत्रकारिता के अधिकारों का संज्ञान लिया। कोर्ट के इस आदेश को अभिव्यक्ति की आजादी और खोजी पत्रकारिता की बड़ी जीत माना जा रहा है। जनहित की खबरें दिखाने पर पत्रकारों पर दर्ज होने वाली FIR और इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले पर आपकी क्या राय है? कमेंट में अपनी प्रतिक्रिया दर्ज करें। #AllahabadHighCourt #LucknowNews #JournalismIsNotACrime #UPNews #FreedomOfPress
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