सावधान! "लगेगी आग तो आयेंगे कई घर जद में, यहां पे सिर्फ़ हमारा मकान थोड़ी है!" समय रहते सुधार कर लिए तो ठीक है वरना, "जाकी रहे भावना जैसी प्रभु मूरत देखी तिन तैसी" अंतिम में फिर यही होगा, "का वर्षा जब कृषि सुखाने समय चूकी पुनि का पक्षाताने" पछतावा के अलावा आपके हिस्से में कुछ नहीं आएगा।
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