मोहम्मद इरफान से बातचीत के दौरान,🥺 रिपोर्टर--कहां रहते हो, कौन सा घर है !! इरफान--ये है न सर.. रिपोर्टर--ये तुम्हारा घर है!! इरफान--ये मेरी जीविका है सर.. रिपोर्टर--देख सकते है अंदर.. इरफान-- (आश्चर्यचकित होकर हंसते हुए) अंदर जाएंगे सर!! रिपोर्टर--हां देख लेते हैं, किधर से एंट्री है!! इरफान--ये एंट्री है.. (पर्दा उठाते हुए..) अंदर आप क्या करेंगे सर!! पर्दा हटाकर अंदर जाते हुए इरफान कहता है, "सर, अंदर बिस्तर लगा हुआ है सर वहां पर.. रिपोर्टर-- यहीं सोते हो!! इरफान--यहां सोता हूं पापा और मैं.. एक घर सी ब्लॉक में है न, तो मम्मी और बहनें वहां सो जाती हैं.. और ये उस घर से भी ज्यादा अहमियत रखता है मेरी जिंदगी में.. क्योंकि यहां पापा बर्फ बेचते हैं और मैं भी काम करता हूं न इसलिए सर.. रिपोर्टर--देख सकते हैं हम!! देखना चाहते हैं.. इरफान--हां सर, यहां नहाने का है सर.. ईत्तर लगवा दिया था ताकि थोड़ी महक थी न!! आप आ रहे हो तो ईत्तर लगवा दिया था.. पूरी शीशी छिड़क दी है रिपोर्टर--तभी खुशबू आ रही है.. इरफान--हां सर, आप आ रहे हो, आपको परेशानी न हो सर. रिपोर्टर--अरे नहीं नहीं.. इरफान--और ये मेरा बिस्तर है सर, ये पंखा है सर.. रिपोर्टर--अच्छा ये लगा रखा है.. इरफान--बहुत सारी परेशानियां हैं सर, लेकिन हकीकत ये है कि श्रमिकों को बेहतर जीवन मिलना चाहिए.. चाहे ओला-उबर हो चाहे डीसी के कंडक्टर हों..
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