महान पत्रकार और स्वतंत्रता सेनानी गणेश शंकर 'विद्यार्थी' केवल एक संपादक नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ उठने वाली बुलंद आवाज थे। जब रायबरेली के सई नदी तट पर हुए 'मुंशीगंज गोलीकांड' में निहत्थे किसानों पर गोलियां चलाई गईं, तो विद्यार्थी जी ने अपने पत्र 'प्रताप' के जरिए इसकी तुलना 'जलियांवाला बाग हत्याकांड' से कर अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया था। इस निर्भीक रिपोर्टिंग के लिए उन्हें 6 महीने की जेल हुई और अखबार पर ₹1,000 का जुर्माना लगा। विद्यार्थी जी न केवल अपनी कलम से सामाजिक नफरत के खिलाफ लड़े, बल्कि 1925-26 में प्रांतीय काउंसिल के सदस्य भी बने। हालांकि, 1929 में पार्टी के निर्देश पर उन्होंने पद से इस्तीफा देकर साबित कर दिया कि उनके लिए राष्ट्रहित ही सर्वोपरि है। चर्चा - @neeraj_jhaa & @DrPankajSpeaks पूरी वीडियो Molitics के YouTube चैनल पर देखें। लिंक - #GaneshShankarVidyarthi #MunshiganjMassacre #History #IndianFreedomStruggle
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