जंतर-मंतर पर अपने हक के लिए खड़े छात्र हों या कांवड़ यात्रा में नारेबाज़ी करने वाले युवा दोनों एक ही उम्र (Gen Z) के हैं। फर्क सिर्फ सोच, शिक्षा और वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) का है। जब तक युवा ज्योतिबा फुले और बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों को पढ़कर सवाल पूछना नहीं सीखेंगे, तब तक वे सिर्फ इस्तेमाल होते रहेंगे। समाज के एक वर्ग को केवल मोहरा बनाया जाता है, लेकिन जब अधिकार बांटने की बात आती है तो वो पीछे छूट जाते हैं। क्या युवाओं को शिक्षा और रोजगार चाहिए या सिर्फ नारों का शोर? सवाल पूछने वाला युवा या हुड़दंग करने वाला युवा, व्यवस्था को कौन पसंद है? चर्चा - @neeraj_jhaa और @hemannt_yadava लिंक - #SocialAnalysis #GenZ #EducationFirst #ScientificTemper #GenZ #YouthAndPolitics
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